याँहा हैते पाइनु रघुनाथ - महाशय ।
याँहा हैते पाइनु श्री - स्वरूप - आश्रय ॥202॥
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अनुवाद
उनकी कृपा से मुझे महापुरुष श्री रघुनाथदास गोस्वामी की शरण प्राप्त हुई है और उनकी कृपा से ही मुझे श्रीस्वरूप दामोदर की शरण मिली है।
By his grace I have got the shelter of a great man like Shri Raghunathdas Goswami and by his grace I have got the shelter of Shri Swarup Damodar.
तात्पर्य
जो कोई भी श्री श्री राधा और कृष्ण की सेवा में निपुण बनना चाहता हो, उसे हमेशा स्वरूप दामोदर गोस्वामी, रूप गोस्वामी, सनातन गोस्वामी और रघुनाथ दास गोस्वामी के मार्गदर्शन में रहने की कोशिश करनी चाहिए। गोस्वामियों के संरक्षण में आने के लिए, किसी को नित्यानंद प्रभु की दया और अनुग्रह प्राप्त करना होगा। लेखक ने इन दो छंदों में इस तथ्य को समझाने का प्रयास किया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥