ब्रह्माण्डे प्रकाश तार कृष्णेर इच्छाय ।
एकइ स्वरूप तार, नाहि दुइ काय ॥19॥
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अनुवाद
वह धाम भगवान कृष्ण की इच्छा से इस भौतिक जगत में प्रकट हुआ है। यह उस मूल गोकुल के समान है; वे दो भिन्न शरीर नहीं हैं।
That abode appears within the material world by the will of Lord Krishna. It is non-different from the original Gokul. These are not two distinct places.
तात्पर्य
ऊपर वर्णित धाम भगवान कृष्ण की सर्वशक्तिमान इच्छा के द्वारा चल हैं। जब श्री कृष्ण धरती के चेहरे पर प्रकट होते हैं, वह अपने धामों को बिना उनकी मौलिक संरचना बदले हुए भी प्रकट कर सकते हैं। धरती पर धामों और आध्यात्मिक आसमान में धामों में कोई भेद नहीं किया जाना चाहिए, यह सोचते हुए कि धरती पर धाम भौतिक हैं और मौलिक आवास आध्यात्मिक हैं। वे सभी आध्यात्मिक हैं। सिर्फ़ हमारे लिए, जो अपनी वर्तमान स्थित में मामले से आगे कुछ भी अनुभव नहीं कर सकते, धाम और स्वयं भगवान अपने अर्चा फॉर्म में हमारे सामने भौतिक जैसे दिखाई देते हैं ताकि हमें भौतिक आँखों से आत्मा को देखने की सुविधा मिल सके। शुरुआत में यह किसी नौसिखिए के लिए समझना मुश्किल हो सकता है, लेकिन समय बीतने के साथ, जब कोई भक्ति सेव में आगे बढ़ता है, यह आसान हो जाता है, और वह इन रूपों में भगवान की मौजूदगी को समझ लेता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥