श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 187
 
 
श्लोक  1.5.187 
चन्दन - लेपित - अङ्ग, तिलक सुठाम ।
मत्त - गज जिनि मद - मन्थर पयान ॥187॥
 
 
अनुवाद
उनके शरीर पर चंदन का लेप लगा हुआ था और उन्हें तिलक से सजाया गया था। उनकी चाल पागल हाथी जैसी थी।
 
His body was coated with sandalwood paste and adorned with a tilak. His gait was one that would have tempted a mad elephant.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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