vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ
»
श्लोक 185
श्लोक
1.5.185
सुवलित हस्त, पद, कमल - नयान ।
पट्ट - वस्त्र शिरे, पट्ट - वस्त्र परिधान ॥185॥
अनुवाद
उनके हाथ, भुजाएँ और पैर सुन्दर थे, और आँखें कमल के फूल जैसी थीं। वे रेशमी वस्त्र पहनते थे और सिर पर रेशमी पगड़ी बाँधते थे।
His hands, arms and feet were very beautiful and His eyes were like lotus flowers.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×