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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 1: आदि लीला
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अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ
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श्लोक 180
श्लोक
1.5.180
भाइके भर्तिसनु मुञि, लबा एइ गुण ।
सेइ रात्रे प्रभु मोरे दिला दरशन ॥180॥
अनुवाद
उस रात भगवान नित्यानन्द ने मुझे स्वप्न में दर्शन दिये, क्योंकि मैंने अपने भाई को दण्ड देने का अच्छा गुण दिखाया था।
That night Bhagavan Nityananda appeared to me in a dream because I had done a good deed by rebuking my brother.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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