श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 173
 
 
श्लोक  1.5.173 
चैतन्य - प्रभुते ताँर सुदृढ़ विश्वास ।
नित्यानन्द - प्रति ताँर विश्वास - आभास ॥173॥
 
 
अनुवाद
मेरे भाई को भगवान चैतन्य में दृढ़ विश्वास था, लेकिन भगवान नित्यानंद में विश्वास की एक धुंधली सी झलक थी।
 
My brother had unwavering faith in Lord Sri Chaitanya Mahaprabhu, but only a little faith in Lord Nityananda.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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