श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  1.5.165 
ये नयन देखिते अश्रु हय मने यार ।
सेइ नेत्रे अविच्छिन्न वहे अश्रु - धार ॥165॥
 
 
अनुवाद
जब कोई मिनकेतन रामदास की आँखों को देखता था, तो उसकी आँखों से स्वतः ही आँसू बहने लगते थे, क्योंकि मिनकेतन रामदास की आँखों से लगातार आँसू बहते रहते थे।
 
Whenever someone looked into the eyes of Meenketan Ramdas, tears would automatically start flowing from his eyes, because a stream of tears kept flowing continuously from the eyes of Meenketan Ramdas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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