श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 160
 
 
श्लोक  1.5.160 
उल्लास - उपरि लेखों तोमार प्रसाद ।
नित्यानन्द प्रभु, मोर क्षम अपराध ॥160॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु नित्यानंद, मैं बड़े हर्ष से आपकी कृपा का गान कर रहा हूँ। कृपया मेरे अपराधों को क्षमा करें।
 
O Nityananda Prabhu, I am writing about your grace with great joy. Please forgive me for this transgression.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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