श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 154
 
 
श्लोक  1.5.154 
सेइ अंश लञा ज्येष्ठ - कनिष्ठाभिमान ।
अंशांशि - रूपे शास्त्रे करये व्याख्यान ॥154॥
 
 
अनुवाद
कृष्ण और बलराम अपने को छोटे भाई तथा बड़े भाई के रूप में प्रस्तुत करते हैं, किन्तु शास्त्रों में उन्हें आदि भगवान् तथा उनके अंश के रूप में वर्णित किया गया है।
 
Krishna and Balarama appear as younger and elder brothers, but in the scriptures they are described as the original Lord and His parts.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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