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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  1.5.149 
नित्यानन्द - स्वरूप पूर्वे हइया लक्ष्मण ।
लघु - भ्राता हैया करे रामेर सेवन ॥149॥
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानंद स्वरूप पहले लक्ष्मण के रूप में प्रकट हुए थे और भगवान रामचंद्र की सेवा उनके छोटे भाई के रूप में की थी।
 
Lord Nityananda Swarupa appeared in his previous birth as Lakshmana and served Lord Ramachandra as his younger brother.
तात्पर्य
शंकराचार्य सम्प्रदाय के संन्यासियों में ब्रह्मचारियों के लिए भिन्न-भिन्न नाम हैं। प्रत्येक संन्यासी का कुछ सहायक होते हैं, जिन्हें ब्रह्मचारी कहते हैं, जिन्हें संन्यासी के नाम के अनुसार ही भिन्न-भिन्न नामों से पुकारा जाता है। ऐसे ब्रह्मचारियों के नाम चार हैं: स्वरूप, आनंद, प्रकाश और चैतन्य। नित्यानंद प्रभु ने अपना स्वरूप ब्रह्मचारी रूप में ही रखा था; उन्होंने कभी संन्यास नहीं लिया। ब्रह्मचारी के रूप में उनका नाम नित्यानंद स्वरूप था। अतः, जिस संन्यासी के रहते वह रहते थे, वह शंकराचार्य सम्प्रदाय के किसी तीर्थ या आश्रम से ही होना चाहिए, क्योंकि ऐसे संन्यासी के सहायक ब्रह्मचारी के लिए एक नाम स्वरूप ही है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)