सेइ त’ ‘अनन्त’ ‘शेष’ - भक्त - अवतार ।
ईश्वरेर सेवा विना नाहि जाने आर ॥120॥
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अनुवाद
वे अनंत शेष भगवान के भक्त अवतार हैं। वे भगवान कृष्ण की सेवा के अलावा और कुछ नहीं जानते।
He is the devotee incarnation of Ananta Sesha, the Supreme Lord. He knows nothing except the service of Lord Krishna.
तात्पर्य
श्रील जीव गोस्वामी ने अपने कृष्ण-संदर्भ में शेषनाग का वर्णन इस प्रकार किया है : "श्री अनंतदेव के हजारों मुख हैं और वे पूर्णतः स्वतंत्र हैं। वे हमेशा परमेश्वर की सर्वोच्च विभूति की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं, वे उनकी लगातार सेवा करते हैं। वासुदेव का प्रथम विस्तार संकर्षण है, और क्योंकि वे अपनी स्वयं की इच्छा से प्रकट होते हैं, उन्हें स्वराट कहा जाता है, पूर्णतः स्वतंत्र। इसलिए वे अनंत हैं और वे समय और स्थान की सभी सीमाओं से परे हैं। वे स्वयं हजार सिर वाले शेष के रूप में प्रकट होते हैं।" स्कंद पुराण के अयोध्या-माहात्म्य अध्याय में, देवता इंद्र ने शेषनाग से निवेदन किया, जो लक्ष्मण के रूप में उनके सामने खड़े थे, "कृपया अपने शाश्वत निवास, विष्णुलोक जाएं, जहां आपके विस्तार शेष, अपने सर्प के फन के साथ, उपस्थित हैं।" इस प्रकार लक्ष्मण को पाताल के क्षेत्र में भेजने के बाद, भगवान इंद्र अपने निवास को लौट आए। यह उद्धरण बताता है कि चतुर्भुज रूप का संकर्षण भगवान राम के साथ लक्ष्मण के रूप में अवतरित होते हैं। जब भगवान राम विलीन हो जाते हैं, तो शेष फिर से लक्ष्मण के व्यक्तित्व से खुद को अलग कर लेते हैं। फिर शेष पाताल क्षेत्र में अपने अपने निवास पर लौट जाते हैं, और लक्ष्मण वैकुण्ठ में अपने निवास पर लौट जाते हैं। लघु- भागवतामृत निम्नलिखित वर्णन देता है : "चतुर्भुज रूपों के दूसरे समूह का संकर्षण राम के रूप में प्रकट होता है, जो अपने साथ शेष को ले जाते हैं, जो ग्लोबल क्षेत्रों को धारण करते हैं। शेष के दो रूप हैं। एक होता है ग्लोब धारण करने वाला, और दूसरा होता है शय्या सेवक। ग्लोब धारण करने वाले शेष संकर्षण का शक्तिशाली अवतार हैं, और इसलिए उन्हें कभी-कभार संकर्षण भी कहा जाता है। शेष का शय्या रूप वाला स्वरूप हमेशा प्रभु का एक शाश्वत सेवक बनकर प्रस्तुत होता है।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥