युग - मन्वन्तरे ध रि’ नाना अवतार ।
धर्म संस्थापन करे, अधर्म संहार ॥113॥
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अनुवाद
मनु के युगों और सहस्राब्दियों में, वे वास्तविक धर्म के सिद्धांतों को स्थापित करने और अधर्म के सिद्धांतों को हराने के लिए विभिन्न अवतारों के रूप में प्रकट होते हैं।
The Lord appears in various incarnations in different ages and Manvantaras to establish the principles of true Dharma and destroy the principles of Adharma.
तात्पर्य
सागर में शयनरत भगवान विष्णु ब्रह्मांड के नियमों को बनाए रखने और विघ्न के कारणों का नाश करने के लिए विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं। इस तरह के अवतार हर मन्वंतर (यानी प्रत्येक मनु के शासनकाल के दौरान, जो 71 x 4,320,000 वर्षों तक रहता है) में दिखाई देते हैं। ब्रह्मा के एक दिन के दौरान, ऐसे चौदह मनु जन्म लेते और मरते हैं, जिससे अगले मनु के लिए जगह बनती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥