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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  1.5.111 
ताँहा क्षीरोदधि - मध्ये ‘श्वेतद्वीप’ नाम ।
पालयिता विष्णु, - ताँर सेइ निज धाम ॥111॥
 
 
अनुवाद
वहाँ, क्षीरसागर के एक भाग में श्वेतद्वीप स्थित है, जो पालनहार भगवान विष्णु का निवास स्थान है।
 
There in the middle of the Kshirsagar is Shvetadvipa, the abode of Vishnu, the preserver.
तात्पर्य
सिद्धांतशिरोमणि, जो एक ज्योतिषीय ग्रंथ है, में विभिन्न महासागरों का वर्णन इस प्रकार किया गया है: (1) खारे पानी का महासागर, (2) दूध का महासागर, (3) दही का महासागर, (4) घी का महासागर, (5) गन्ने के रस का महासागर, (6) मदिरा का महासागर और (7) मीठे पानी का महासागर। खारे पानी के महासागर के दक्षिणी तरफ दूध का महासागर है, जहां भगवान क्षीरोंदकशायी विष्णु निवास करते हैं। वहाँ ब्रह्मा जैसे देवता उनकी पूजा करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)