श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  1.5.110 
नारायणेर नाभि - नाल - मध्येते धरणी ।
धरणीर मध्ये सप्त समुद्र ये गणि ॥110॥
 
 
अनुवाद
भगवान नारायण की नाभि कमल से निकले तने के भीतर भौतिक लोक स्थित हैं। इन लोकों में सात महासागर भी हैं।
 
All the material worlds are situated within the lotus stem that emanates from the navel lotus of Lord Narayana. Between these worlds are seven oceans.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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