श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.5.11 
सर्व - रूपे आस्वादये कृष्ण - सेवानन्द ।
सेइ बलराम - गौर - सङ्गे नित्यानन्द ॥11॥
 
 
अनुवाद
सभी रूपों में वे कृष्ण की सेवा के दिव्य आनंद का आस्वादन करते हैं। वही बलराम भगवान नित्यानन्द हैं, जो भगवान गौरसुन्दर के सखा हैं।
 
He enjoys the transcendental bliss of serving Krishna in all His manifestations. He is Lord Balarama, the companion of Lord Gaurasundara, Nityananda Prabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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