श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  1.5.108 
दशम श्लोकेर अर्थ कैल विवरण ।
एकादश श्लोकेर अर्थ शुन दिया मन ॥108॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने दसवें श्लोक का अर्थ समझाया है। अब कृपया ग्यारहवें श्लोक का अर्थ मन लगाकर सुनिए।
 
I have thus explained the meaning of the tenth verse. Now, please listen attentively to the meaning of the eleventh verse.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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