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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.5.10 
सृष्ट्यादिक सेवा, - ताँर आज्ञार पालन ।
‘शेष’ - रूपे करे कृष्णेर विविध सेवन ॥10॥
 
 
अनुवाद
वे सृष्टि-कार्य में भगवान कृष्ण के आदेशों का पालन करते हैं और भगवान शेष के रूप में विभिन्न प्रकार से कृष्ण की सेवा करते हैं।
 
He carries out the orders of Lord Krishna in the work of creation and as Lord Sesha, he serves Krishna in many ways.
तात्पर्य
विशेषज्ञों की राय के अनुसार, बालराम, प्रारंभिक चतुर्भुज स्वरूपों के प्रमुख के रूप में, मूल सङ्कर्षण भी हैं। कृष्ण के पहले विस्तार बालराम, पांच रूपों में स्वयं का विस्तार करते हैं: (1) महासंकर्षण, (2) कारणार्णवषायी, (3) गर्भोदकशायी, (4) क्षीरोंदकषायी और (5) शेष। ये पांच पूर्ण भाग आध्यात्मिक और भौतिक दोनों ही ब्रह्माण्डीय अभिव्यक्तियों के लिए उत्तरदायी हैं। इन पांच रूपों में भगवान बलराम, भगवान कृष्ण को उनकी गतिविधियों में सहायता करते हैं। इन पांच रूपों में से पहले चार रूप ब्रह्मांडीय अभिव्यक्तियों के लिए जिम्मेदार हैं, जबकि शेष भगवान की व्यक्तिगत सेवा के लिए जिम्मेदार है। शेष को अनंत कहा जाता है, या असीमित, क्योंकि वह भगवान की असीमित विस्तार में असीमित विविধता की सेवाओं को निभाकर सहायता करते हैं। श्री बलराम देवता के सेवक हैं जो अस्तित्व और ज्ञान के सभी मामलों में भगवान कृष्ण की सेवा करते हैं। भगवान नित्यानंद प्रभु, जो वही सेवक देवता हैं, बालराम, भगवान गौरांग की निरंतर साहचर्य द्वारा वही सेवा करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)