श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.5.10 
सृष्ट्यादिक सेवा, - ताँर आज्ञार पालन ।
‘शेष’ - रूपे करे कृष्णेर विविध सेवन ॥10॥
 
 
अनुवाद
वे सृष्टि-कार्य में भगवान कृष्ण के आदेशों का पालन करते हैं और भगवान शेष के रूप में विभिन्न प्रकार से कृष्ण की सेवा करते हैं।
 
He carries out the orders of Lord Krishna in the work of creation and as Lord Sesha, he serves Krishna in many ways.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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