श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  1.4.82 
गोविन्दानन्दिनी राधा, गोविन्द - मोहिनी ।
गोविन्द - सर्वस्व, सर्व - कान्ता - शिरोमणि ॥82॥
 
 
अनुवाद
राधा ही गोविंद को आनंद प्रदान करने वाली हैं और गोविंद की मोहिनी भी हैं। वे गोविंद की सर्वस्व हैं और उनकी सभी पत्नियों की शिरोमणि हैं।
 
Sri Radha is the source of joy and enchantment for Govinda. She is Govinda's everything and the crown jewel of all his beloveds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)