श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  1.4.71 
कृष्ण - प्रेम - भावित याँर चित्तेन्द्रिय - काय ।
कृष्ण - निज - शक्ति राधा क्रीड़ार सहाय ॥71॥
 
 
अनुवाद
उसका मन, इन्द्रियाँ और शरीर कृष्ण के प्रेम में डूबे हुए हैं। वह कृष्ण की अपनी शक्ति है और उनकी लीलाओं में उनकी सहायता करती है।
 
Her mind, senses, and body are imbued with love for Krishna. She is Krishna's personal energy and assists him in his pastimes.
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