श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 4: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के गुह्य कारण  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.4.40 
सेइ द्वारे आचण्डाले कीर्तन सञ्चारे ।
नाम - प्रेम - माला गाँथि’ पराइल संसारे ॥40॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उन्होंने अछूतों में भी कीर्तन का प्रसार किया। उन्होंने पवित्र नाम और प्रेम की एक माला बनाई, जिससे उन्होंने समस्त भौतिक जगत को सजाया।
 
In this way, he spread the chanting of the name of God among the untouchables. He wove the garland of the holy name and love into the entire material world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)