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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 1: आदि लीला
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अध्याय 3: श्री चैतन्य महाप्रभु के प्राकट्य के बाह्य कारण
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श्लोक 22
श्लोक
1.3.22
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥22॥
अनुवाद
हे भारतवंशी! जब-जब धर्म का ह्रास होता है और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब मैं अवतरित होता हूँ।
“O descendant of Bharata, whenever and wherever there is decline in Dharma and increase in Adharma, I Myself incarnate.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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