अंश - शक्त्यावेश - रूपे द्वि - विधावतार ।
बाल्य पौगण्ड धर्म दुइ त’ प्रकार ॥98॥
Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
"उनके अवतार दो प्रकार के होते हैं, आंशिक और सशक्त। वे दो युगों में प्रकट होते हैं - बाल्यावस्था और बाल्यावस्था।
"His incarnations are of two kinds—partial and powerful. He appears in two states—childhood and adolescence."
तात्पर्य
विलास रूप छह प्रकार के होते हैं। अवतार दो प्रकार के होते हैं: शक्ति-आवेश अर्थात शक्ति से युक्त, और अंशावेश अर्थात अंश से युक्त। ये अवतार भी प्रभवा और वैभव अभिव्यक्तियों की श्रेणी में आते हैं। बाल्य और पौढ़ापन भगवान श्री कृष्ण के व्यक्तित्व की दो विशेष विशेषताएं हैं, लेकिन उनकी स्थायी विशेषता किशोरावस्था के रूप में उनका शाश्वत रूप है। भगवान श्री कृष्ण के मूल व्यक्तित्व की हमेशा इस शाश्वत किशोरावस्था के रूप में पूजा की जाती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥