श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  1.2.49 
कारणाब्धि - गर्भोदक - क्षीरोदक - शायी ।
माया - द्वारे सृष्टि करे, ताते सब मायी ॥49॥
 
 
अनुवाद
"नारायण के कारणोदकशायी, गर्भोदकशायी और क्षीरोदकशायी रूप सभी भौतिक ऊर्जा के सहयोग से सृजन करते हैं। इस प्रकार वे माया से जुड़े रहते हैं।"
 
"The Karanodakashayi, Garbhodakashayi, and Kshirodakashayi forms of Narayana perform the work of creation with the help of material energy. Thus, they are connected with Maya.
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