नारायणस्त्वं न हि सर्व - देहिनाम् आत्मास्यधीशाखिल - लोक - साक्षी ।
नारायणोऽङ्गं नर - भू - जलायनात् तच्चापि सत्यं न तवैव माया ॥30॥
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अनुवाद
"हे देवों के देव, आप समस्त सृष्टि के द्रष्टा हैं। आप वास्तव में सबके प्रिय प्राण हैं। अतः क्या आप मेरे पिता नारायण नहीं हैं? नारायण वह है जिसका निवास नर [गर्भोदकशायी विष्णु] से उत्पन्न जल में है, और वह नारायण आपका पूर्ण अंश है। आपके सभी पूर्ण अंश दिव्य हैं। वे निरपेक्ष हैं और माया की रचना नहीं हैं।"
O Lord of Lords! You are the seer of all creation. You are undoubtedly the beloved soul of everyone. So are you not my father, Shri Narayana? Narayana means the one whose home is in the water, born from the male (garbhodakasayi Vishnu), and that Narayana is your part. All your complete parts are divine. They are the ultimate complete and are not created by Maya.
तात्पर्य
यह वक्तव्य जो श्रीमद भागवतम् (10.14.14) से लिया गया है, भगवान ब्रह्मा द्वारा प्रभु कृष्ण से उनकी प्रार्थनाओं में कहा गया था, भगवान द्वारा अपनी आध्यात्मिक शक्तियों का प्रदर्शन करके उन्हें पराजित करने के पश्चात। ब्रह्मा ने यह परखने की कोशिश की थी कि क्या भगवान कृष्ण सचमुच भगवान हैं और एक चरवाहे के रूप में खेल रहे हैं। ब्रह्मा ने चरागाहों से सभी लड़के और उनके बछड़ों को चुरा लिया, लेकिन जब वह वापस लौटा तो उसने देखा कि सभी लड़के और बछड़े अभी भी वहाँ हैं, क्योंकि भगवान कृष्ण ने उन सभी को फिर से बनाया था। जब ब्रह्मा ने भगवान कृष्ण की इस आध्यात्मिक शक्ति को देखा, तो उसने हार मान ली और प्रभु से प्रार्थना की, उसे सृष्टि में हर चीज़ के मालिक और द्रष्टा के रूप में और उस परम आत्मा के रूप में संबोधित करते हुए जो हर जीवित हस्ती के भीतर है और जो सभी के लिए प्रिय है। वह भगवान कृष्ण नारायण हैं, ब्रह्मा के पिता हैं, क्योंकि भगवान कृष्ण के पूर्ण विस्तार गर्भोदकशायी विष्णु, अपने आप को गर्भ महासागर पर स्थापित करने के बाद, अपने शरीर से ब्रह्मा को बनाया था। कारण महासागर में महाविष्णु और सभी के हृदय में परम आत्मा क्षीरसागरशायी विष्णु, परम सत्य के आध्यात्मिक विस्तार भी हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥