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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  1.2.116 
सब श्रोता - गणेर करि चरण वन्दन ।
ए सब सिद्धान्त शुन, करि’ एक मन ॥116॥
 
 
अनुवाद
इस प्रवचन को सुनने या पढ़ने वाले सभी लोगों के चरणों में मेरा वंदन। कृपया इन सभी कथनों का निष्कर्ष ध्यानपूर्वक सुनें।
 
I bow down to all who listen to or read this story. Please listen carefully to the essence of all these sayings.
तात्पर्य
श्री चैतन्य चरितामृत के लेखक अपने पाठकों को पैरों पर दंडवत करते हुए, उनसे विनम्रतापूर्वक निवेदन करते हैं कि वे परम सत्य के बारे में इन निर्णायक तर्कों को ध्यान से सुनें। किसी को भी ऐसे तर्कों को सुनने में विफल नहीं होना चाहिए, क्योंकि केवल ऐसे ज्ञान से ही व्यक्ति कृष्ण को पूरी तरह से जान सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)