श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 2: पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  1.2.111 
सेइ त’ भक्तेर वाक्य नहे व्यभिचारी ।
सकल सम्भवे ताँते, याते अवतारी ॥111॥
 
 
अनुवाद
परन्तु एक सच्चे भक्त के मुख से निकले ऐसे शब्द झूठे नहीं हो सकते। सभी संभावनाएँ उनमें विद्यमान हैं, क्योंकि वे आदि भगवान हैं।
 
But such words, uttered by a sincere devotee, can never be false. They contain all possibilities, for He is the original Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)