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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  1.17.83 
रक्त - पीत - वर्ण, - नाहि अष्ठि - वल्कल ।
एक जनेर पेट भरे खाइले एक फल ॥83॥
 
 
अनुवाद
फल लाल और पीले थे, अंदर कोई बीज नहीं था और बाहर कोई छिलका नहीं था, और एक फल खाने से आदमी का पेट तुरंत भर जाता था।
 
These fruits were red and yellow, they had neither seeds nor peel and eating just one fruit could fill a person's stomach.
तात्पर्य
भारत में एक आम को सबसे अच्छा तब माना जाता है जब वह लाल और पीला हो, उसका बीज बहुत छोटा हो, उसका छिलका बहुत पतला हो, और वह इतना स्वादिष्ट हो कि यदि कोई व्यक्ति एक फल खाता है तो वह संतुष्ट हो जाएगा। आम को सभी फलों का राजा माना जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)