Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  1.17.65 
मुकुन्द - दत्तेरे कैल दण्ड - परसाद ।
खण्डिल ताहार चित्तेर सब अवसाद ॥65॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने मुकुंद दत्त को दण्ड का आशीर्वाद दिया और इस प्रकार उनके सभी मानसिक अवसाद दूर हो गए।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu gave punishment to Mukunda Datta in the form of Prasad and thus removed all his mental depression.
तात्पर्य
मुकुंद दत्त को एक बार मायावादी व्यक्तिनिष्ठ लोगों संग मिलने के कारण श्री चैतन्य महाप्रभु से मिलने से मना कर दिया। जब भगवान चैतन्य ने अपने महाप्रकाश को प्रकट किया, तो उन्होंने एक-एक कर सभी भक्तों को आवाज़ लगाई और उनका आशीर्वाद दिया, जबकि मुकुंद दत्त दरवाज़े के बाहर खड़े रहे। भक्तों ने भगवान को बताया कि मुकुंद दत्त बाहर इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन भगवान ने जवाब दिया, "मैं जल्द ही मुकुंड दत्त से प्रसन्न नहीं होऊंगा, क्योंकि वह भक्तों के बीच भक्ति मार्ग की व्याख्या करता है, फिर भी मायावादियों के पास उनके यहाँ मेयावाद के दर्शन से भरे योग-वाशिष्ठ-रामायण को सुनने जाता है। इस कारण मैं उनसे बहुत नाराज़ हूँ।" उस तरह से भगवान की बात सुनकर, बाहर खड़े मुकुंद दत्त अत्यधिक प्रसन्न हुए कि भगवान किसी समय उनसे प्रसन्न होंगे, हालाँकि वह उस समय प्रसन्न नहीं थे। लेकिन जब भगवान को एहसास हुआ कि मुकुंद दत्त मायावादियों की संगति को हमेशा के लिए त्यागने जा रहे हैं, तो उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की, और उन्होंने मुकुंद का आशीर्वाद देने के लिए उन्हें तुरंत बुलाया। इस प्रकार उन्होंने उन्हें मायावादियों की संगति से मुक्त किया और उन्हें शुद्ध भक्तों की संगति प्रदान की।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)