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अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु संन्यास आश्रम ग्रहण करके जगन्नाथपुरी गए और वहाँ से कुलिया गाँव लौटे, तो लौटकर उस पापी ने भगवान के चरणकमलों की शरण ली। भगवान ने उस पर कृपा करके उसके कल्याणार्थ उसे उपदेश दिए।
When Sri Chaitanya Mahaprabhu went to Jagannath Puri after taking sanyas (renunciation) and then returned to Kuliya village, the sinner took refuge at the Lord's lotus feet. Mahaprabhu graciously gave him a sermon for his benefit.
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर ने अपने अनुभाष्य में कुलिया ग्राम के संबंध में निम्नलिखित नोट दिया है। मूल रूप से कुलिया नाम से जाना जाने वाला गाँव अब नवद्वीप शहर के रूप में विकसित हो गया है। भक्तिरत्नाकर, चैतन्य-चरित-महाकाव्य, चैतन्य-चंद्रोदय-नाटक और चैतन्य-भागवत जैसी विभिन्न प्रामाणिक पुस्तकों में उल्लेख किया गया है कि कुलिया ग्राम गंगा के पश्चिमी भाग में स्थित है। अब भी, कोलाद्वीप के नाम से जाने जाने वाले क्षेत्र के भीतर, कुलीआरा गंज और कुलीआरा दह नामक एक स्थान है, दोनों ही वर्तमान नवद्वीप नगरपालिका के अधिकार क्षेत्र के भीतर हैं। भगवान चैतन्य महाप्रभु के समय में गंगा के पश्चिमी किनारे पर कुलिया और पहाडापुरा नामक दो गाँव बाहिरद्वीप के अधिकार क्षेत्र में आते थे। उस समय गंगा के पूर्वी किनारे पर स्थित स्थान जिसे अब अंतर्द्वीप के रूप में जाना जाता है, उसे नवद्वीप के रूप में जाना जाता था। उस समय गंगा के पूर्वी किनारे पर स्थित स्थान जिसे अब अंतर्द्वीप के रूप में जाना जाता है, उसे नवद्वीप के रूप में जाना जाता था। श्री मायापुर में उस जगह को अभी भी द्वीपरा माथा के नाम से जाना जाता है। काँचाड़ापाड़ा के पास कुलिया नाम का एक और स्थान है, लेकिन यह यहाँ वर्णित कुलिया नहीं है। इसे अपराध-भंजनेरा पाटा या वह स्थान नहीं माना जा सकता जहाँ अपराध को माफ किया गया था, क्योंकि वह गंगा के पश्चिमी किनारे पर स्थित उपर्युक्त कुलिया में हुआ था। व्यावसायिक कारणों से कई ईर्ष्यालु व्यक्ति वास्तविक स्थान की खुदाई का विरोध करते हैं, और कभी-कभी वे अनधिकृत स्थानों को अधिकृत स्थल के रूप में विज्ञापित करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥