श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.17.43 
तबे सब शिष्ट - लोक करे हाहाकार ।
ऐछे कर्म हेथा कैल को दुराचार ॥43॥
 
 
अनुवाद
तब सभी उपस्थित सज्जन चिल्ला उठे, "यह क्या है? यह क्या है? किसने ऐसा कुकृत्य किया है? वह पापी व्यक्ति कौन है?"
 
Then all the gentlemen gathered there cried out, "What is this? What is this? Who has done this mischief? Who is that sinner?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)