vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ
»
श्लोक 43
श्लोक
1.17.43
तबे सब शिष्ट - लोक करे हाहाकार ।
ऐछे कर्म हेथा कैल को दुराचार ॥43॥
अनुवाद
तब सभी उपस्थित सज्जन चिल्ला उठे, "यह क्या है? यह क्या है? किसने ऐसा कुकृत्य किया है? वह पापी व्यक्ति कौन है?"
Then all the gentlemen gathered there cried out, "What is this? What is this? Who has done this mischief? Who is that sinner?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×