श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 325
 
 
श्लोक  1.17.325 
त्रयोदशे महाप्रभुर ‘जन्म - विवरण’ ।
कृष्ण - नाम - सह यैछे प्रभुर जनम ॥325॥
 
 
अनुवाद
तेरहवें अध्याय में श्री चैतन्य महाप्रभु के जन्म का वर्णन है, जो कृष्ण के पवित्र नाम के कीर्तन के साथ हुआ था।
 
The thirteenth chapter describes the birth of Sri Chaitanya Mahaprabhu, which occurred during the chanting of the name of Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)