श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 322
 
 
श्लोक  1.17.322 
नवमेते ‘भक्ति - कल्प - वृक्षेर वर्णन’ ।
श्री - चैतन्य - माली कैला वृक्ष आरोपण ॥322॥
 
 
अनुवाद
नौवें अध्याय में भक्ति रूपी कल्पवृक्ष का वर्णन है। श्री चैतन्य महाप्रभु स्वयं इसके माली हैं जिन्होंने इसे रोपा था।
 
The ninth chapter describes the wish-fulfilling tree of devotion. Sri Chaitanya Mahaprabhu himself is the gardener who planted it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)