तेंहो त’ चैतन्य - कृष्ण - शचीर नन्दन ।
तृतीय परिच्छेदे जन्मेर ‘सामान्य’ कारण ॥315॥
अनुवाद
श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु, जो स्वयं कृष्ण हैं, अब माता शची के पुत्र के रूप में प्रकट हुए हैं। तीसरे अध्याय में उनके प्रकट होने के सामान्य कारण का वर्णन किया गया है।
Sri Krishna Chaitanya Mahaprabhu, who is Krishna Himself, has now appeared as the son of Mother Shachi.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)