श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 313
 
 
श्लोक  1.17.313 
ताते आदि - लीलार करि परिच्छेद गणन ।
प्रथम परिच्छेदे कैलै ‘मङ्गलाचरण’ ॥313॥
 
 
अनुवाद
इसलिए मैं आदिलीला के अध्यायों की गणना करूँगा। प्रथम अध्याय में मैं गुरुदेव को प्रणाम करता हूँ, क्योंकि यहीं से शुभ लेखन का आरंभ होता है।
 
Therefore, I will enumerate the chapters of Adilila. In the first chapter, I offer my salutations to the Guru, for this is the beginning of this auspicious writing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)