श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 311
 
 
श्लोक  1.17.311 
लिखित ग्रन्थेर यदि करि अनुवाद ।
तबे से ग्रन्थेर अर्थ पाइये आस्वाद ॥311॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं पहले से लिखी गई बातों को दोहराऊं, तो मैं इस शास्त्र के तात्पर्य का आनंद ले सकूंगा।
 
If I repeat what has already been written, then you can appreciate the purpose of this scripture.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)