vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ
»
श्लोक 311
श्लोक
1.17.311
लिखित ग्रन्थेर यदि करि अनुवाद ।
तबे से ग्रन्थेर अर्थ पाइये आस्वाद ॥311॥
अनुवाद
यदि मैं पहले से लिखी गई बातों को दोहराऊं, तो मैं इस शास्त्र के तात्पर्य का आनंद ले सकूंगा।
If I repeat what has already been written, then you can appreciate the purpose of this scripture.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×