इथे तकर् क रि’ केह ना कर संशय ।
कृष्णेर अचिन्त्य - शक्ति एइ मत हय ॥305॥
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अनुवाद
भगवान चैतन्य के चरित्र में निहित विरोधाभासों को सांसारिक तर्क और दलीलों से नहीं समझा जा सकता। इसलिए इस संबंध में संदेह नहीं रखना चाहिए। हमें केवल कृष्ण की अकल्पनीय शक्ति को समझने का प्रयास करना चाहिए; अन्यथा हम यह नहीं समझ पाएँगे कि ऐसे विरोधाभास कैसे संभव हैं।
The contradictions in the character of Mahaprabhu cannot be understood through worldly logic.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥