श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 291
 
 
श्लोक  1.17.291 
लुकाइला दुइ भुज राधार अग्रेते ।
बहु यत्न कैला कृष्ण, नारिल राखिते ॥291॥
 
 
अनुवाद
श्रीमति राधारानी के सामने श्रीकृष्ण को अपनी दो अतिरिक्त भुजाएँ छिपानी पड़ीं। उन्होंने उनके सामने चार भुजाएँ रखने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे ऐसा करने में पूरी तरह असमर्थ रहे।
 
But in front of Srimati Radharani, Shri Krishna had to hide his two extra arms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)