श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 284
 
 
श्लोक  1.17.284 
दूर हैते कृष्णे देखि’ बले गोपी - गण ।
“एइ देख कुञ्जर भितर व्रजेन्द्र - नन्दन” ॥284॥
 
 
अनुवाद
दूर से कृष्ण को देखकर गोपियाँ बोलीं, "ज़रा देखो! यहाँ एक झाड़ी के भीतर नंद महाराज के पुत्र कृष्ण हैं।"
 
Seeing Krishna from a distance, the gopis said, "Just look! Here is Nanda Maharaja's son Krishna inside the grove."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)