श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 279
 
 
श्लोक  1.17.279 
श्यामसुन्दर, शिखिपिच्छ - गुञ्जा - विभूषण ।
गोप - वेश, त्रि - भङ्गिम, मुरली - वदन ॥279॥
 
 
अनुवाद
उनका रंग नीला है, उनके सिर पर मोर पंख है, उनके गले में गुंजा माला है और वे ग्वालबालों के समान अलंकृत हैं। उनका शरीर तीन स्थानों से मुड़ा हुआ है और वे अपने मुख से बांसुरी पकड़े हुए हैं।
 
His complexion is dark, he has a peacock feather on his head, a garland of gunja and is dressed like a cowherd.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)