श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.17.27 
तरु - सम सहिष्णुता वैष्णव करिबे ।
भर्त्सन - ताड़ने काके किछु ना बलिबे ॥27॥
 
 
अनुवाद
"भगवान के पवित्र नाम का जप करने वाले भक्त को वृक्ष के समान धैर्य रखना चाहिए। यदि उसे डाँटा या दंडित भी किया जाए, तो भी उसे दूसरों से बदले में कुछ नहीं कहना चाहिए।"
 
"A person engaged in chanting God's name should have the patience of a tree. Even if rebuked or rebuked, he should not say anything out of revenge."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)