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अनुवाद
मूर्ख शिष्य की बात सुनकर भगवान अत्यन्त क्रोधित हुए और उन्होंने भगवान कृष्ण को अनेक प्रकार से फटकार लगाई। वे एक छड़ी लेकर शिष्य पर प्रहार करने के लिए उठे।
Hearing the foolish student's words, Mahaprabhu became furious and rebuked Lord Krishna in many ways. Then, he took up his stick and began to beat the student.
तात्पर्य
श्रीमद्-भागवतम में वर्णन किया गया है कि जब उद्धव जी भगवान कृष्ण से गोपियों के लिए संदेश लेकर आए, तब सभी गोपियों, खासकर श्रीमती राधारानी ने कृष्ण को विभिन्न रूपों में त्यागा। हालांकि, ऐसे त्याग एक प्रचुर मात्रा में स्नेहशील भाव को दर्शाते हैं जिन्हें एक सामान्य व्यक्ति समझ नहीं सकता। जब मूर्ख छात्र ने भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु से प्रश्न किया, तो भगवान चैतन्य ने इसी तरह प्रेमपूर्ण उमंग में भगवान कृष्ण को फटकार लगाई। जब श्री चैतन्य महाप्रभु गोपियों के भाव में थे और छात्र ने श्री कृष्ण का पक्ष लिया, तो भगवान चैतन्य बहुत क्रोधित हुए। उनका क्रोध देखकर, मूर्ख छात्र, जो एक सामान्य नास्तिक स्मार्त-ब्राह्मण था, ने मूर्खतापूर्ण ढंग से उनका गलत अनुमान लगाया। इसलिए वह और छात्रों का एक दल प्रतिशोध में भगवान पर प्रहार करने के लिए तैयार हो गया। इस घटना के बाद, श्री चैतन्य महाप्रभु ने संन्यास लेने का फैसला किया ताकि लोग उनके खिलाफ अपराध न करें, उन्हें एक सामान्य गृहस्थ मानते हुए, क्योंकि भारत में आज भी एक संन्यासी को स्वाभाविक रूप से सम्मान दिया जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥