श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 236
 
 
श्लोक  1.17.236 
तबे ‘बल’ ‘बल’ प्रभु बले वार - वार ।
पुनः पुनः कहे श्रीवास करिया विस्तार ॥236॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान ने उनसे बार-बार पूछा, "कहो! बोलो!" इस प्रकार श्रीवास ने बार-बार वृन्दावन की लीलाओं का वर्णन किया और उनका विशद वर्णन किया।
 
Thereafter, Mahaprabhu repeatedly said to him, "Keep talking! Keep talking!" In this way, Srivasa repeatedly described the pastimes of Vrindavan in detail.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)