श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 224
 
 
श्लोक  1.17.224 
कीर्तन करिते प्रभु करिला गमन ।
सङ्गे चलि’ आइसे काजी उल्लसित मन ॥224॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु कीर्तन करने के लिए वापस चले गए और काजी भी प्रसन्न मन से उनके साथ चले गए।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu went to perform kirtan and the Qazi also went with him with a happy heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)