श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 223
 
 
श्लोक  1.17.223 
शुनि’ प्रभु ‘हरि’ बलि’ उठिला आपनि ।
उठिल वैष्णव सब क रि’ हरि - ध्वनि ॥223॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर भगवान् उठ खड़े हुए और “हरि! हरि!” कहते हुए, उनके पीछे-पीछे अन्य सभी वैष्णव भी पवित्र नाम का कीर्तन करते हुए उठ खड़े हुए।
 
Hearing this, Mahaprabhu stood up, chanting, "Hari! Hari!" All the other Vaishnavas followed him, chanting the holy name.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)