श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 220
 
 
श्लोक  1.17.220 
तोमार प्रसादे मोर घुचिल कुमति ।
एइ कृपा कर, - येन तोमाते रहु भक्ति ॥220॥
 
 
अनुवाद
"आपकी कृपा से ही मेरे बुरे इरादे नष्ट हो गए हैं। कृपया मुझ पर कृपा करें ताकि मेरी भक्ति सदैव आप पर ही केंद्रित रहे।"
 
"Only by your grace have my evil thoughts been dispelled. Now, please bless me so that my devotion to you remains steadfast."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)