श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 219
 
 
श्लोक  1.17.219 
एत शुनि’ काजी र दुइ चक्षे पड़े पानि ।
प्रभुर चरण छुङि’ बले प्रिय - वाणी ॥219॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर काजी की आँखों से आँसू बहने लगे। उसने तुरन्त भगवान के चरणकमलों का स्पर्श किया और ये मधुर वचन बोले।
 
Hearing this, the Qazi's eyes welled with tears. He immediately touched the Lord's lotus feet and said this in a sweet voice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)