श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 206
 
 
श्लोक  1.17.206 
पूर्वे भाल छिल एइ निमाइ पण्डित ।
गया हैते आसिया चालाय विपरीत ॥206॥
 
 
अनुवाद
निमाई पंडित पहले बहुत अच्छे बालक थे, लेकिन गया से लौटने के बाद से उनका आचरण अलग हो गया है।
 
“Nimai Pandit was a very good boy earlier, but ever since he returned from Gaya, he has started behaving differently.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)