श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 204
 
 
श्लोक  1.17.204 
आसि’ कहे, - हिन्दुर धर्म भाङ्गिल निमाइ ।
ये कीर्तन प्रवर्ताइल, कभु शुनि नाइ ॥204॥
 
 
अनुवाद
मेरे पास आकर हिंदुओं ने शिकायत की, 'निमाई पंडित ने हिंदू धार्मिक सिद्धांतों को तोड़ दिया है। उन्होंने संकीर्तन पद्धति शुरू की है, जिसके बारे में हमने किसी भी धर्मग्रंथ में नहीं सुना।'
 
"Some Hindus came to me and complained, 'Nimai Pandit has broken the principles of Hinduism. He has introduced a system of sankirtan, which we have not heard of in any scriptures.'"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)