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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.17.20 
तबे शुक्लाम्बरेर कैल तण्डुल - भक्षण ।
‘हरेर्नाम’ श्लोकेर कैल अर्थ विवरण ॥20॥
 
 
अनुवाद
इस घटना के बाद भगवान ने शुक्लम्बर ब्रह्मचारी द्वारा दिए गए कच्चे चावल खाए और बृहन्-नारदीय पुराण में वर्णित "हरेर नाम" श्लोक का महत्व बहुत विस्तार से समझाया।
 
After this, Mahaprabhu ate the raw rice given by Shuklamber Brahmachari and explained in detail the meaning of the Harernam verse mentioned in the Brihannaradiya Purana.
तात्पर्य
श्वेत वस्त्र धारण करने वाले ब्रह्मचारी नवद्वीप में गंगा के तट पर निवास करते थे। जब श्री चैतन्य महाप्रभु परमानंद में नृत्य कर रहे थे, तब वह भिक्षा के लिए चावल रखने वाली एक थैली लेकर प्रभु के पास पहुंचे। प्रभु अपने भक्त से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने तुरंत थैली छीन ली और कच्चा चावल खाने लगे। किसी ने उन्हें रोका नहीं, और इस प्रकार उन्होंने पूरे चावल खा लिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)