श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 17: चैतन्य महाप्रभु की युवावस्था की लीलाएँ  »  श्लोक 195
 
 
श्लोक  1.17.195 
‘हरि’ ‘हरि’ करि’ हिन्दु करे कोलाहल ।
पातसाह शुनिले तोमार करिबेक फल ॥195॥
 
 
अनुवाद
"हरि, हरि" का उच्चारण करते हुए हिंदू लोग कोलाहलपूर्ण ध्वनि करते हैं। यदि राजा [पातशाह] इसे सुन लेगा, तो वह तुम्हें अवश्य दण्ड देगा।"
 
Hindus shout "Hari, Hari" and make a commotion. If the king (patsah) hears this, he will surely punish you.
तात्पर्य
हिंदी पाठ :

'पातासहा' शब्द राजा को संदर्भित करता है। नवाब हुसैन शाह, जिनका पूरा नाम 'आलाउद्दीन सैयद हुसैन साह' था, उस समय (1498-1521 ई.) बंगाल के स्वतंत्र राजा थे। पूर्व में वे हबशी वंश के क्रूर नवाब मुजफ्फर खान के सेवक थे परन्तु किसी तरह उन्होंने अपने स्वामी की हत्या करके स्वयं राजा बन गए। बंगाल के सिंहासन (तकनीकी रूप से मसनद कहा जाता है) पर अधिकार करने के बाद उन्होंने खुद को सैयद हुसैन आलाउद्दीन सेरीफ मुक्का घोषित किया। 'रियाज़-उल-सलातीना' नामक एक पुस्तक है जिसके लेखक गुलाम हुसैन कहते हैं कि नवाब हुसैन शाह मुक्का सेरीफ के परिवार से थे। अपने परिवार के गौरव को बनाए रखने के लिए उन्होंने सेरीफ मुक्का नाम ग्रहण किया। हालांकि, वे आम तौर पर नवाब हुसैन शाह के नाम से जाने जाते थे। उनकी मृत्यु के बाद उनका बड़ा बेटा नसरतशाह बंगाल का राजा बना (1521-1533 ई.)। यह राजा भी बहुत क्रूर था। उसने वैष्णवों के खिलाफ कई अत्याचार किए। उसके पापी कर्मों के फलस्वरूप, उसके खोजा गुट के नौकरों में से एक ने उसे मस्जिद में नमाज पढ़ते समय मार डाला।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)